एशिया के टॉप 50 हिंदी लेखक : नोनिया समाज के.

Ganvru Pramod
15 Jun 2025
Nonia

गंवरु प्रमोद, जिनका मूल नाम प्रमोद कुमार है. इनका जन्म 21 मार्च 1975 को बिहार के वैशाली जिले के चेहराकलां प्रखंड के बिशुनपुर अड़रा पंचायत के बिशुनपुर अड़रा गांव में हुआ था. वे एक जाने-माने विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार हैं. इनके पिता स्वर्गीय राम बिलास महतो थे. जब लेखक पांच वर्ष के थे तभी इनके पिता का स्वर्गवास 29 दिसंबर 1980 को हो गया था. इनके पिता मजदूर थे और राजमिस्त्री का कार्य करते थे.

इनके मां मजदूर थीं. बचपन में साहित्यकार गंवरु प्रमोद (प्रमोद कुमार) ने दूसरे के खेतों में मजदूरी किया. इनके घर में सिर्फ इनके बड़े भाई रघुनाथ महतो तीसरी कक्षा पास थे और वर्ष 1981 में मुजफ्फरपुर में ठेले पर भूंजा बेचते थे. गांव के किसी मेहमान ने इनकी मां को सलाह दिया कि बच्चा बड़ा हो रहा है, इसे गांव के स्कूल में एडमिशन करा दीजिए. बिशुनपुर अड़रा गांव के मध्य विद्यालय में इनका (प्रमोदवा) नाम हाजिरी रजिस्टर पर चढ़ा दिया गया किंतु मूल एडमिशन रजिस्टर में नाम इसीलिए नहीं चढ़ाया गया कि कोई अंगूठे का निशान लगानेवाला अथवा रजिस्टर में साइन करने वाला नहीं था. जैसे-तैसे वर्ष 1985 में एडमिशन हुआ जब ये पांचवीं कक्षा में थे. हुआ ये प्रमोदवा ने स्कूल की चौथी कक्षा में टॉप किए और किसी टीचर ने इनके नाम को "प्रमोद कुमार" लिखकर इनके नाम से, अत्यंत पिछड़े के तहत, वजीफे हुए तत्कालीन बीडीओ को संदर्भित कर दिया. इनके नाम से जब वजीफा आया तो मास्टर रजिस्टर (एडमिशन रजिस्टर) में मिलान किया गया. फिर इनके मझीले भाई को बुलाकर अंगूठे का निशान लिया गया. तब जाकर प्रॉपर एडमिशन हुआ और सरकारी वजीफे की राशि इन्हें प्राप्त हो सकी.

प्रमोद कुमार (वर्तमान में विश्व प्रसिद्ध हिंदी-अंग्रेजी के लेखक) छठवीं से दसवीं कक्षा तक दूसरे के खेतों में हल चलाकर मजदूरी किए, कुछ कमाई किए. इनके मां काफी कष्ट करके 200 रूपये उधार में लेकर इनके आगे की पढ़ाई हेतु दी. 1990 में मैट्रिक पास करने के बाद मजदूरी से इकट्ठे किए गए पैसे लेकर ये मुजफ्फरपुर शहर चले गए और वहीं एक कालेज के इंटर क्लास में एडमिशन कराया. रात में भाड़े की रिक्शा चलाकर पैसे कमाए और तब एडमिशन आदि तथा मकान किराया के एडवांस आदि पैसे को चुकता कर पाए. एक रहमदिल एसिस्टेंट प्रोफेसर ने इन्हें बच्चे का ट्यूशन दिया और फिर बच्चों को ट्यूशन से पढ़ा कर पैसे कमाने लगे. ग्रेजुएशन थर्ड ईयर में थे तो क्लर्क कम कैशियर की पोस्ट पर गुजरात बी.एस.आर.बी. टॉप सेकेंड रैंक हासिल करके गुजरात के राजकोट जिले के जेतलसर नामक स्थान पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 1996 के सितंबर में नौकरी प्राप्त किया. वहां से रिजाइन करके तत्कालीन उत्तर प्रदेश (वर्तमान में उत्तराखंड) के चनौदा में (सुमित्रानंदन पंत जी के जन्म स्थान कौशानी के निकट) केनरा बैंक में (बीएसआरबी, लखनऊ के थ्रू) क्लर्क कम टाइपिस्ट की नौकरी की. वहां तबीयत खराब होने के कारण रिजाइन कर दिया और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (संचार मंत्रालय) में लोअर डिविजन क्लर्क के पद पर ज्वाइन किया, क्योंकि ये उसी वर्ष एसएससी का फाइनल टेस्ट पास कर चुके थे.

प्रमोद कुमार ने ग्यारहवीं कक्षा में थे तभी वे "नककटवा की बहुरिया" बज्जिका कहानी लिखे थे. कई कविताएं भी लिखे. चार बैंकिंग सर्विस रिक्रूटमेंट बोर्ड के इंटरव्यू दिए और तीन में फाइनली पास भी किए. सभी में उन्होंने बोर्ड मेंबर को कविता सुनाया. तालियां और वाहवाहियां भी बटोरीं.

सेंट्रल सेक्रेटेरिएट ज्वाइन करने के बाद काफी कठिनाई में सिविल सर्विसेज की तैयारी किए. लेकिन शायद टॉपनॉस्ट पोस्ट के लिए उनकी तैयारी अधिकतम नहीं हो सकी. टॉप पद हेतु तैयारी के दौरान उनके तीस वर्ष उम्र के बीत गए और एक बार में ही सेंट्रल लेबर मिनिस्ट्री के तहत आने वाले ईएसआईसी में एग्जाम पास करके इंस्पेक्टर / अधीक्षक बने.

इनकी लिखी पांडुलिपि को राजमंगल प्रकाशन ने सर्वप्रथम छापा . इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा इनके महाकाव्य पुस्तक "सीतायण" को वर्ष 2022 में, सबसे अधिक सर्गों वाला अब तक का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य घोषित किया. मध्य प्रदेश की एक संस्था के सर्वे में ये एशिया के टॉप पचास और भारत के टॉप दस लेखकों में शामिल हैं. भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा वर्ष 2021 से लेकर वर्ष 2024 तक की कई पुस्तकें ("कासृति हिंदुस्तान की" बृहद निबंध पुस्तक, "कूजा के फूल" उपन्यास सहित) भारत के सभी सरकारी विभाग की लाइब्रेरियों के लिए लिस्टेड है.

हिंदी और अंग्रेजी ने इन्होंने लगभग ढाई दर्जन पुस्तकें लिखा है. सभी पुस्तके वर्ल्डवाइड सभी नेटवर्क पर "ganvru pramod" के नाम से उपलब्ध है. इनकी मोटिवेशनल पुस्तके गुजरात के अहमदाबाद के निरमा लॉ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जाती है. इनके पुस्तकें USA के वेस्ट वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के हिंदी मोटिवेशनल सेंटर में भी पढ़ाई जाती है.