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एशिया के टॉप 50 हिंदी लेखक : नोनिया समाज के. जितनी हमारी आबादी उतनी हमारी भागीदारी के नारे से 26 नवंबर 2023 को किया नोनीया जाती के लोगों द्वारा खाड़ी से सोड़ा और नमक बना रहे हैं। इतिहास ग झारखंड राज्य नोनिया समाज की ओर से माइकल जॉन सभागार में सावन महोत्सव का राष्ट्रीय जनता दल (बिहार) के पुनः प्रदेश उपाध्यक्ष बनने पर माननीय पूर् नोनिया सेना टीम पहुंचा जितवारपुर समस्तीपुर जहा राजा महतो के पूरे परिवा बिहार में पहली बार नोनिया सेना के द्वारा दांडी यात्रा निकलेगा नोनिया ब शिक्षित समाज, सशक्त समाज विषय पर नोनिया, बिन्द और बेलदार समाज के द्वार एशिया के टॉप 50 हिंदी लेखक : नोनिया समाज के. जितनी हमारी आबादी उतनी हमारी भागीदारी के नारे से 26 नवंबर 2023 को किया नोनीया जाती के लोगों द्वारा खाड़ी से सोड़ा और नमक बना रहे हैं। इतिहास ग झारखंड राज्य नोनिया समाज की ओर से माइकल जॉन सभागार में सावन महोत्सव का राष्ट्रीय जनता दल (बिहार) के पुनः प्रदेश उपाध्यक्ष बनने पर माननीय पूर् नोनिया सेना टीम पहुंचा जितवारपुर समस्तीपुर जहा राजा महतो के पूरे परिवा बिहार में पहली बार नोनिया सेना के द्वारा दांडी यात्रा निकलेगा नोनिया ब शिक्षित समाज, सशक्त समाज विषय पर नोनिया, बिन्द और बेलदार समाज के द्वार

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जितनी हमारी आबादी उतनी हमारी भागीदारी के नारे से 26 नवंबर 2023 को किया गया नोनिया समाज महासम्मेलन, यह सम्मेलन का अध्यक्षता किये मिथिलांचल नोनिया समाज संघ के अध्यक्ष Ashok Kumar Prasad जी

नोनिया समाज के अध्यक्ष Ashok Kumar Prasad जी ने कहा मिथिलांचल क्षेत्र से आज तक आजादी के इतने वर्षों बाद भी हमारे समाज से एक भी विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं है। शैक्षणिक एवं राजनीतिक अधिकार नहीं मिला है जिस कारण हमारा समाज का विकास नहीं हो पा रहा है। यह रैली नोनिया समाज का खोया हुआ हक, अधिकार के लिए है। यह महारैली आप नोनिया, बिन्द, बेलदार स्वजातिय बंधुओं, माताओं, बहनों एवं नवजवानों साथियों के हक एवं अधिकार के लिए है। राजनीतिक अधिकार एवं शैक्षणिक अधिकार हमारे लिए सर्वप्रथम है। नोनिया समाज के अध्यक्ष Ashok Kumar Prasad जी ने कहा हमारे समाज के लिए हमारे मुख्य मांगे हैं जो मैं सरकार से आग्रह करता हूं यह मांग को जल्द से जल्द पूरा करें और नोनिया समाज को सम्मान दें अधिकार दें। (1) हमारी आबादी के हिसाब से सरकार में भागीदारी सुनिश्चित हो (2) नोनिया बिन्द बेलदार को राज्य सरकार द्वारा ST की सुविधा प्रदान करें (3) नोनिया समाज का इतिहास एवं महापुरुषों के बारे में राज्य शिक्षा बोर्ड के द्वारा इतिहास के विषय में पढ़ाया जाए (4) नोनिया समाज के आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के स्नातक स्नाकोत्तर शिक्षा प्राप्ति के लिए निशुल्क व्यवस्था की जाए एवं छात्रावास की व्यवस्था की जाए (5) नोनिया समाज के पैतृक पेसा मिट्टी से नमक सोडा कड़ी बनाने का पारंपरिक व्यवस्था को आधुनिकरण कर अनुसंधान केंद्र खोला जाए और इसे नोनिया समाज के लिए आरक्षित किया जाए

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नोनीया जाती के लोगों द्वारा खाड़ी से सोड़ा और नमक बना रहे हैं। इतिहास गवाह है कि "सबसे पहले अंग्रेजो के विरुद्ध "नोनीया नोनीया विद्रोह " हुआ था, जिसका मुख्य केंद्र सारण (छपरा सीवान गोपालगंज), मुजफ्फरपुर मोतीहारी, और दरभंगा था, जो करीब १०० वर्षो तक

ये तस्वीर १८०५ का है, छपरा जिला के कोठेंया और कोरिया गांव का है जिसमें ये दर्शाता है कि नोनीया जाती के लोगों द्वारा खाड़ी से सोड़ा और नमक बना रहे हैं। इतिहास गवाह है कि "सबसे पहले अंग्रेजो के विरुद्ध "नोनीया नोनीया विद्रोह " हुआ था, जिसका मुख्य केंद्र सारण (छपरा सीवान गोपालगंज), मुजफ्फरपुर मोतीहारी, और दरभंगा था, जो करीब १०० वर्षो तक संघर्ष हुआ, उस संघर्ष में नोनीया जाती के साथ उनके उप जातियां बिंद मल्लाह बेलदार जाती के सभी भाईयों ने साथ दिया। जो आज नोनीया विद्रोह के नाम से जाना जाता है। अंग्रेजों के दमनकारी नीतियों के कारण सैकड़ों वर्षों तक इस समाज का शोषण होते रहा और इस आज़ाद भारत में भी इस समाज में अशिक्षा ब्यआप्त रहने के कारण भिन्न-भिन्न समूहों में बंटकर शोषण का शिकार होते आ रहे हैं। हमारा वंशावली आदिवासी का है, फिर भी हमें सांवैधानिक मौलिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। अतः अब भी समय है हमें संगठित होकर अपने आदिवासी आरक्षण के लिए संघर्षरत रहना है।

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झारखंड राज्य नोनिया समाज की ओर से माइकल जॉन सभागार में सावन महोत्सव का आयोजन किया गया।

जमशेदपुर । झारखंड राज्य नोनिया समाज की ओर से माइकल जॉन सभागार में सावन महोत्सव का आयोजन किया गया। उद्घाटन सांसद विद्युत वरण महतो ने किया। पहले सत्र में आमसभा हुई, जिसमें कई प्रस्ताव पारित किए गए। 2023 समानित किया गया। महिलाओं ने समाज के होनहार विद्यार्थियों को शिवशक्ति, दहेज प्रकोप नामक नाटक की प्रस्तुत दी। बच्चियों ने पारंपरिक और मॉडर्न नृत्य प्रस्तुत किया। नोनिया समाज सामाजिक एवं शैक्षणिक स्तर पर लगातार आगे बढ़ रहा है। जनसंख्या के आधार पर राजनीति सक्रियता भी बढ़ी है। लेकिन झारखंड की राजनीति में जनसंख्या के अनुपात में इस समाज को हिस्सेदारी नहीं मिल रही है। उक्त बातें वे जदयू प्रवक्ता सह संस्कृत शिक्षा बोर्ड बिहार की पूर्व अध्यक्ष डॉ भारती मेहता ने कहीं। रविवार को झारखंड राज्य नोनिया समाज द्वारा माइकल जॉन ऑडिटोरियम में आयोजित वार्षिक मिलन समारोह सह सावन महोत्सव में उन्होंने कहा- बिहार में इस समाज के विधायकों की संख्या 7 है, लेकिन खंड में शून्य है। यह समाज के लोगों के लिए चिंता का विषय है स्थान बताएं, भवन बनवाएंगे सांसद सांसद विद्युतवरण महतो ने कहा- समाज के लोगों की ओर से काफी दिनों से सामुदायिक भवन निर्माण की मांग हो रही है। समाज लोग मुझे स्थल चयन कर दें, मैं अपने निधि से भवन का निर्माण कराऊंगा। किसी भी तरह की समस्या होने पर मुझे संपर्क करें। मैं हमेशा समाज के साथ खड़ा रहूंगा। लोग एकजुट हों जयनाथ चौहान विशिष्ट अतिथि बिहार प्रदेश अति पिछड़ा संघ मोर्चा के अध्यक्ष जयनाथ चौहान ने कहा हमलोग नमक बनाने वाले के वंशज है। झारखंड में काफी संख्या में हैं। जबतक ये एकजुट नहीं होंगे, तबतक समाज का सशक्तिरण नहीं हो सकता है और न ही राज्य में राजनीति हिस्सेदारी मिल सकती है।

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स्वर्गीय जनकधारी सिंह बिहार नोनिया समाज के भीष्म पितामह।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी और बिहार के नोनिया समाज के भीष्म पितामह एवं अन्य पिछड़ी जातियों के अग्रदूत स्वर्गीय जनकधारी सिंह का जन्म 14 जनवरी 1914 में बिहार प्रांत के पटना जिले के दनियावा गांव के एक सम्पन्न नोनिया परिवार में हुआ था । धन्य हैं इनकी माता और पिता श्री ज्ञानचंद चौहान जिन्होंने सादा जीवन और उच्च विचार से युक्त ऐसे पुत्र को जन्म दिया । इनका परिवार बहुत बड़ा और शिक्षित था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई। स्कूली शिक्षा के बाद जब वे थोड़ा होशियार हुए तो उस समय देश की आजादी के लिए संघर्ष करने का दौड़ चल रहा था, जिससे ये अछुते नहीं रहे बल्कि अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता की लड़ाई में भी सक्रिय भूमिका निभाई। 1949 मे वह अपने गांव छोड़कर पटना मेआकर बस गये जनकधारी सिंह एक समाजिक व्यक्ति थे जो नोनिया, बिंद,बेलदार समाज के साथ अन्य पिछड़ी जातियों के समाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास के प्रति हमेशा सजग रहते थे। 1958 मे वे बाल विवाह की प्रथा पर रोक लगाने के लिए सरकार के पास आवेदन दिया एवं गांव गांव मीटिंग करके इस प्रथा को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता पैदा किए। स्वर्गीय जनकधारी सिंह 1960 से ठेकेदारी लाइन मे प्रवेश किये तब से लोग उन्हे जनक ठेकेदार के नाम से भी जानने लगे उनके कंपनी का नाम सिंह एण्ड संस कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड था।उस जमाने मे बिहार के PWD विभाग डिविजन के वे अकेला ठेकेदार थे इस कंस्ट्रक्शन के संचालन के दौरान वह अपने समाज के बहुत सारे लोगों को रोजगार दिए जब तक उनका कंपनी चला अपने लोगों को ही साथ में रखें और उनके विकास पर ध्यान दिए वे हमेशा बच्चो के शिक्षा पर जोर देते थे वे शिक्षा के महत्व को समझाते थे। उनका मानना था कि शिक्षा के विकास से नशामुक्ति अभियान चला कर अपने समाज को सुधार किया जा सकता है। 1973 मे वह पटना मे एक शिव मंदिर का निर्माण कराया एवं इसी साल 1973 मे ही वह अखिल भारतीय चौहान महासंघ से जुड़े और उस संध से जुड़ने के बाद अपने समाज मे जागरूकता लाने के बिहार के कई जिलो मे सम्मेलन कराये।चौहान संदेश पुस्तक निकालने में इनका भी योगदान था उन्होंने ही सर्व प्रथम बिहार के नोनिया, बिंद, बेलदार अति पिछड़ी जातियों के हक और अधिकार की लड़ाई लड़ने के लिए सन् 1978 में बिहार राज्य मिट्टी कटी मजदूर संघ की स्थापना की थी जिसके वे संस्थापक थे। ये संध वह अपने समाज के लोगों के लिए ही बनाये थे उस समय अपने समाज के ज्यादातर लोग मजदूरी का काम करते थे उन्हें जमींदारों ठेकेदारों से उचित मजदूरी नहीं मिलता था इसलिए उनके हक के लिए वे बिहार सरकार एवं केन्द्र सरकार से समाज के गरीब मजदूरो के हक के लिए आवाज उठाते रहे। 1975 मे सर्वप्रथम बिहार की राजधानी पटना के सेन्ट लेडी स्टिंफन हौल मे स्वर्गीय जनकधारी सिंह की अध्यक्षता में एक विशाल सम्मेलन किया गया उस मीटिंग के चीफ गेस्ट उस समय के मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा थे वह हमेशा बिहार की राजधानी पटना में रहने के कारण जो भी लोग बिहार के बाहर से पटना आते थे तो उन्हें रहने खाने-पीने सभी चीज की इन्तेजाम स्वर्गीय जनकधारी सिंह अपने खर्चे पर किया करते थे वह कोई भी सामाजिक कार्य या बैठक अपने खर्च पर ही किया करते थे नोनिया, बिंद, बेलदार समाज के वास्तविक हक के लिए ये जीवन भर संघर्ष करते रहे। वे हमेशा समाज को शिक्षित करने का और समाज को संगठीत करने का प्रयास करते रहे। एक बार वे राजनीति के क्षेत्र में भी अपनी किस्मत आजमाई थी । उन्हें लगता था कि राजनीति में जाकर पावर में आने पर ज्यादा लोगों की सेवा कर सकते हैं इसलिए सन् 1980 में इन्होंने बिहार के नवादा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा उनका चुनाव चिन्ह मछली छाप था। वे इस चुनाव में विजई नहीं हो पाये परन्तु 9833 मत लाकर तीसरे स्थान पर रहे । एक सम्पन्न परिवार से ताल्लुक रखते हुए भी इन्होंने कभी दिखावें की जिन्दगी नहीं जिया, बल्कि इन्होंने बहुत ही सरल और सादा जीवन उच्च विचार को अपनाया था। वह दहेज प्रथा के खिलाफ थे उन्होंने अपने किसी भी पुत्र की शादी में दहेज नहीं लिया सिर्फ शगुन के तौर पर 51 या 101रूपया लड़के के हाथ में रखवाये एवं अपने संपत्ति से बेटे एवं बेटियों को बराबर हिस्सा दिया यही उनके अच्छे आदर्शवादी विचारधारा को दर्शाता है वे जब-तक स्वस्थ रहे तब तक अपना जीवन अपने समाज के लिए दिया। 1985 से अस्वस्थता के कारण वह चारपाई पर पड़े पड़े भी समाज के लिए ही सोचते रहे । एवं 18 अक्टूबर 1994 को नोनिया समाज के इस भीष्म पितामह ने अपने समाज की चिंता में ही अंतिम सांसें लीं और पंच- तत्वों में विलीन हो गए। - यह सच्ची लेखनी स्वर्गीय जनकधारी सिंह के पौत्र संजय कुमार सिंह के कलम से ।

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अनीता देवी ( Anita Devi Rjd bihar ) महागठबंधन सरकार में फिर बनी मंत्री, अति पिछड़ा वर्ग कल्याण की मिली जिम्मेदारी

आरजेडी कोटे से एक बार फिर से अनीता देवी को पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री बनाया गया है. पहले की महागठबंधन की सरकार में भी अनीता देवी मंत्री थी. शपथ लेने के बाद बातचीत में अनीता देवी ने अपने नेताओं RJD Supremo Lalu Prasad Yadav और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और तेज प्रताप यादव को धन्यवाद दिया है. इसके साथा ही अनीता देवी ने कहा कि जो भी हम लोगों का एजेंडा है, उस पर काम करेंगे. बीजेपी नेताओं के बायन जिसमें कहा जा रहा है कि फिर से बिहार में जंगलराज आ गया, इस पर उन्होंने कहा कि वे लोग तो बयानबाजी करते रहेंगे, कोई जंगलराज नहीं आया है.

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